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हिन्दी आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है ,
आओ हिन्दी को बचाए ,देश की भाषा ही देश का गोरव है , "मनोरंजन कलश" (मासिक पत्रिका ) इसी लो को आगे ले जा रही है ,जनवरी में "रास्ट्रभाषा विशेषांक " देश को समर्पित करके । इस अभियान में सहयोग करे । पत्रिका का अंक बुक कराये ,या वार्षिक सदस्य बने । इसी विषय पर लेख , कविता , कहानी , समालोचना प्रेषित करे । पोस्ट प्राप्त होने की अन्तिम तारीख ५ दिसम्बर २००९ ।
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शब्द सीमा : ५०० शब्द
डाक से पोस्ट करे : संपादक ,मनोरंजन कलश , जे -५ , पांडव नगर ,गली नम्बर - ८ , नई दिल्ली - ९२

लघुकथा - योजना
" आज हजारो लोगो की मृत्यु नशे से हो रही है ,
लोग शराब पीकर बीमारियो से लड़ रहे है ,
अपनी जिन्दगी तबाह कर रहे है ,
हमें इस बुराई को समाज से ख़त्म करना है । हमारी सरकार इसके लिए योजनाये बना रही है । " चुनावी सभा में स्थानीय नेता रामजीभाईजी के इतना बोलते ही तालियों की गडगडाहट से माहोल चुनावी हो गया । जब नेताजी अपने लाव - लश्कर के साथ रवानगी लेने को थे ,तो एक टीवी पत्रकार ने उनसे पूछ लिया ,
" रामजी शराब से होने वाली मोतो को रोकने के लिए आपकी सरकार क्या योजना बना rahi रही है , जरा बताइए । "
"योजना बड़ी ही कारगर और गुप्त है , अभी बता दूंगा तो विपक्ष हंगामा मचा देगा । " सायरन की आवाज करती उनकी गाड़ी धूल उड़ाती हुई चली गई ।
अगले दिन नगर के प्रमुख दनिक में ख़बर छपी ।
" सरकार ने सो शराब की दुकानों को लाईसेंस दिया ,शराब पर टैक्स में वृदि् । टैक्स के मुनाफे से सरकार नशामुक्ति केन्द्र खोलेगी - रामजी भाई "
मंत्रीजी का बयान देख कर वह पत्रकार भी आवक था ।
-केशव जांगिड (लेखक)
लघुकथा - नारी" अनुज वह एक लड़की है । "
" ठीक है तुम बच्चा गिरवा दो , मै आता हू ।"
"वह अस्पताल पहुचता है , तब तक अनुराधा गर्भपात करवा चुकी थी ।
" इस दहेजी और महंगाई के ज़माने मै लड़की का बोझ मेरा बेटा नही उठाएगा , समझी तू । " रह रह कर उसे सास की बाते याद आ रही थी । यह चौथी बार था , जब सास की कर्णभेदी
बाते और पति की मारपीट से तंग आकर उसने अस्पताल का रास्ता देखा था । दो - तीन घंटो बाद अनुराधा पति के साथ घर आ गई । पुरे रास्ते उसे अनुज की जलील करने बाते सुननी पड़ी । वह तो रो - रो कर निढाल सी हो गई थी । समय पंख लगा कर चला । एक दिन घर में कोहराम मच गया,
जब मेज पर पड़ी अनुराधा की गर्भपात रिपोर्ट सास ने देखी । वह अनुज के कमरे की तरफ़ दौडी ।
"हाय राम , इस कुलक्षणी ने हमें बर्बाद कर दिया , कोख मै पल रहे लड़के को गिरवा आई ।" सास ने अनुज को रिपोर्ट दिखाई । क्रोध से लाल हुए अनुज का हाथ अनुराधा पर चल पाता , तब तक वह उसका हाथ पकड़ चुकी थी ।
" मै नही चाहती थी की मेरी कोख से एक खुनी का पुत्र जन्मे , जिसके दिल में अपने पिता की तरह ही नारी का सम्मान ना हो , जो उसे पेरो की जूती समझता हो , जो इन्सान मातृशक्ति और सृजनदात्री नारी का सम्मान ना कर सके ,उसका अंश कोख में रखकर कंलकित नही होना चाहती थी । "
" जीवन का आधार केवल पुरूष ही नही है , नारी भी है , जिस दिन आपको यह सत्य समझ में आ जाए , मुझे वापस बुला लेना । " कहते हुए वह रणचंडी की तरह वह चली गई ।
उसके पदचाप अब भी माँ , बेटे के दिमाग को झंझोड रहे थे ।
- केशव जांगिड (लेखक )
कविता - रिश्तेकुछ देहे से जन्मे ,
कुछ कोख में पड़े अजन्मे ,
कुछ मनके ,
कुछ अनमने,
कितने रिश्ते अब तक मेने बुने ,
कुछ चाहते जो ,
रिश्ते ना बन पाई ,,
कुछ रिश्तो में ,
चाहत ना बस पाई ,
जिन्दगी रिश्तों और चाह्तों
की डोर में,
उलझी जिन्दगी को यू सुलझाया ,
रिश्तों का जिन्दगी से समझोता कराया ,
रिश्तों से समझोता करते ,
खूब देखे मेने ,
लेकिन समझोतो से रिश्ते ,
बुने मेने बुने ।
- केशव जांगिड (लेखक और कवि )
हिन्दी बचाओ अभियान
हिंदी हूँ मैं! हिंदी हूँ मैं..
भारत माता के माथे की बिंदी हूँ
मैदेवों का दिया ज्ञान हूँ मै, घट रही वो शान हूँ मै,
हिन्दुस्तानियों का इमान हूँ मै॥
इस देश की भाषा थी मै,करोडो लोगो की आशा थी मैहिंदी हूँ मैं!
हूँ मैं.. भारत माता के माथे की बिंदी हूँ मैसोचती हूँ शायद बची हूँ मै,
किसी दिल में अभी भी बसी हूँ मै,पर अंग्रेजी के बीच फसी हूँ मै...
न मनाओ तुम मेरी बरसी,मत करों ये शोक सभाएं,
मत याद करो वो कहानी...
नही किसी की जुबानीसोचती थी हिंद देश की भाषा हूँ मै,
अभिव्यक्ति की परिभाषा हूँ मैं,सच्ची अभिलाषा हूँ मैं,
लेकिन अब निराशा हूँ मैं...जी हाँ हिंदी हूँ
मैंभारत माँ के माथे की बिंदी हूँ मैं...
(हिमांशु डबराल की पंक्तिया )







