सोमवार, 23 नवंबर 2009

कविता - बेटी





बाबुल की आन और शान है बेटी ,
इस धरा पर मालिक का वरदान
है बेटी ,

जीवन यदि संगीत है तो सरगम
है बेटी ,
रिश्तो के कानन में भटके इन्सान
की मधुबन सी मुस्कान है बेटी,


जनक की फूलवारी में कभी प्रीत
की क्यारी में ,
रंग और सुगंध का महका गुलबाग
है बेटी ,

त्याग और स्नेह की सूरत है ,
दया और रिश्तो की मूरत है
बेटी ,


कण - कण है कोमल सुंदर
अनूप है बेटी ,
ह्रदय की लकीरो का सच्चा
रूप है बेटी ,

अनुनय , विनय , अनुराग
है बेटी ,
इस वसुधा और रीत और प्रीत
का राग है बेटी ,

माता - पिता के मन का
वंदन है बेटी ,
भाई के ललाट का चंदन
है बेटी ।
- केशव जांगिड(कवि और लेखक )
(बाल साहित्य बाल क्लब से सम्मानित -२००८ )

2 टिप्‍पणियां:

  1. "अनुनय , विनय , अनुराग
    है बेटी , इस वसुधा और रीत और प्रीत
    का राग है बेटी , माता - पिता के मन का
    वंदन है बेटी , भाई के ललाट का चंदन
    है बेटी ।"

    बहुत सुन्दर कविता...!!

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