सोमवार, 23 नवंबर 2009

जागरण गीत


लिया तिरंगा हाथो में ,
अपना लहू बहा कर ,
भारत को आजाद कराया
,
अपना शीश कटाकर ।

खुदीराम चढ़ा सूली पर ,
बिस्मिल ने फांसी पाई ,
भगत सिंह ने क़ुरबानी दी ,
लाला ने लाठी खायी ।

गाँधी जी ने किया आहवान ,
विदेशी होली जलाई,
पंचशील अपना कर नेहरू ने ,
भारत को नई रहा दिखाई।


था वो सागरमल गोपा ,
अग्नि पथ शहीदी पाई ,
थी रानी मर्दानी वो ,
जिससे गोरो ने मुंहकी खाई ।

मंगल ने विद्ध्रोह फूंका,
सावरकर ने चेतना जगाई ,
इन्ही सत्याग्रहों से हमने ,
मातृभूमि आजाद कराई ।

हुए साठ उन को ,
गाथाये जो वीरो ने बनाई ,
सोचो जरा अपने मन में ,
क्या सच्ची आजादी हमने पाई ।

कभी आतंकी सांसद पर ,
कभी स्वाभिमान पर वार करे ,
जयपुर , दिल्ली , बंगलुरु में
जनता हाहाकार करे ।

कश्मीरी माता बहनों से ,
आतंकी खिलवाड़ करे ,
ऐसा नृशंस तांडव देख ,
भारत माँ चीत्कार करे ।

कभी हमारी सीमाओं पर ,
शत्रु दो से चार बने ,
ऐसे में हम जगतगुरु ,
क्यो ना प्रतिकार करे ।

उत्तर ,दक्षिण , पूरब ,पश्चिम ,
बारूदों से दहले है ,
भारत माँ के वीर सपूतो ,
अब हम नहले पर दहले है ।

भारत माँ की रक्षा में ,
अर्पित करे शोर्य , तरुणाई ,
दुष्टो का करे दमन हम ,
ले विजय की अंगडाई ।

लोहपुरूष से बने हम ,
गाँधी से बने आहिंसावादी,
काम , क्रोध , वासनाए त्यागे ,
पहने हम स्वदेशी खादी ।

सदा -सर्वदा करे अंत,
भ्रष्टाचारी दानव का हम ,
शान्ति के अणु परमाणु बन ,
दीन - दुखियों के बने मरहम

बुराईया अब भारत छोड़ो ,
आओ युवाओ भारत जोड़ो ,
सत्य , संकल्प , सेवा ,सहयोग ,
तत्वों से भारत को जोड़ो ।

देशप्रेम की खातिर प्यारो ,
दुश्मन से तुम लड़ जाओ ,
मातृभूमि की रक्षा में ,
मस्तक अमर कर जाओ ।

तभी हमारी यह वसुधा ,
कर्मभूमि बलवान बनेगी ,
भारत भाग्य विधाता होगा ,
दुनिया हमें नमन करगी ।

केशव जांगिड (कवि और पत्रकार )
(बाल साहित्य बाल क्लब से पुरुस्कृत -2008)


























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