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केशव जांगिड (कवि एवं लेखक )
शुक्रवार, 18 मार्च 2011
नाचो, गाओ ,धूम मचाओ
फिर से आई है होली
रंग बिरंगी जमी लग रही
इंद्र धनुष रंगोली .
होली का हुद्दंग मचा है
गलीयो में चोबारो में
भिग रहा है हर्षित मन
मस्ती भरी फुहारो में .
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