बुधवार, 6 जनवरी 2010

नव चेतना उत्सव -२०१० /लेखक -मनीष जैन
कहा कमी है हमारे विकास में (चीन को ध्यान में रखकर )शायद हम में से बहुत से लोगों को याद होगा कि चीन जो हमारा पडौसी देश है १९५० में स्वतंत्र हुआ था , हमसे भी २-३ वर्ष बाद में किन्तु यदि हम आज के परिप्रेक्ष्य में भारत और चीन कि तुलना करे तो यह बात सरलता से नहीं मनती आज चीन विकास के मामले में नित्य नए नए आयाम बना रहा है वही हम अब भी मंथर गति से आगे बढ़ रहे है कई बातो में तो वो अमेरिका, विकसित यूरोपीय देशो और रूस आदि से भी आगे बढ़ चुका है वस्तुतः बड़े देश की समस्याएँ भी बड़ी होती है, किन्तु चीन ने जनसँख्या तथा क्षेत्रफल दोनों ही दृष्टि से बड़े राष्ट्र होने के बाद भी समस्याओं को कभी हावी नहीं होने दिया, परिणाम सामने है विकास की यंत्सिक्यंग (गंगा) ऐसे क्या कारण है, तथ्य है जिनके कारण हमारा देश भारत आज भी विकास के मामले में उतना तेजी से नहीं बढ पाया जितना बढना था जैसे कि चीन ने किया आइये प्रकाश डाले कुछ बातों पर :१। स्वार्थपरक, दलगत, जातिगत और पक्षपात पूर्ण राजनीति - चुने हुए लोग भी स्वार्थ और पक्षपात की राजनीति में लिप्त पाए गए और उन्होंने देश के विकास की बजाय दल, जाती या क्षेत्र का विकास अधिक ज़रूरी समझा ऐसा शायद धार्मिक, जातीय तथा क्षेत्रीय विविधता के कारण भी संभव है, साथ ही कहीं न कहीं असुरक्षा की भावना का भी इसमें योगदान है जबकि चीन में साम्यवाद राजनीति का मूल मंत्र रहा अतः विचारो पर झगड़ने के बनिस्पत उन्होंने जनता की समस्याओं को सुलझाने में मदद की , आखिर साम्यवाद का मूल उद्देश्य भी यहीं था की सभी वर्ग समान हो जाए, विकसित हो २. भ्रष्टाचार - अंग्रेज लोग जो नौकरशाही, राजनीति हमारे लिए छोड़ गए थे, उसे ही हमने हूबहू अपना लिया परिणामस्वरूप वो सभी कमिया भी हमने अपना ली जिन्हें अंग्रेजों ने जान बूझकर छोड़ा था वर्षो की नितांत गुलामी के बाद जब जनता भूखी थी, बीमार थी, गरीब थी, तब जिन्हें भी अवसर मिला और जिनका ईमान सस्ता था, उन्होंने सच झूठ किया, और अपने घर भर दिए उस सम्पति से जो जनता की थी, जनता के लिए थी और विकास बस कागजों में ही रहा अब तो भ्रष्टाचार यहाँ हर जगह फैल गया है और एक अंग बन चुका है व्यवस्था का जबकि चीन में स्थिति इतनी गंभीर नहीं है , फलस्वरूप पैसा अधिक मात्रा में लगा और विकास हुआइसके अलावा कुछ और बाते है जिनके कारण भी चीन विकास के मामले में भारत से आगे है १. चीन की उच्च बचत दर२. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने की समुचित नीतियां और वातावरण (हमारे यहाँ नीतियां अस्पष्ट तथा अवसरवादी है, वोट की राजनीति होती है ) ३. शांतिप्रिय और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण (नित होते दंगे, विस्फोट और अन्य घटनाओं से भय का माहोल है हमारे यहाँ, अतः निवेशक बिदकते है ) ४. शीघ्र निरणय लेने की क्षमता (जो की हमारे यहाँ दलों की खीचतान में संभव नहीं हो पाता, परमाणु करार इसका उदहारण है )५. समग्र सोच के साथ व्यापारिक दृष्टि ६. संसाधनों की प्रचुरता ( चीन के पास भारत से तीन गुना क्षेत्र है जबकि जनसँख्या कुछ ही अधिक है ) ७. दृढ राजनीतिक इच्छा शक्ति तथा आत्म सम्मान और विकास से कोई समझोता नहीं (ब्रह्मपुत्र पर बाँध तथा ओलंपिक मशाल के लिए एवेरेस्ट तक सड़क बनाने की सोच चीन की दृढ इच्छा शक्ति दर्शाती है )८. निर्माण का शक्तिशाली केंद्र (भारत अभी भी दूसरो पर किसी न किसी रूप में निर्भर है )९. विदेशी व्यापार बढाना और सस्ती वस्तुओं के माध्यम से अन्य देशो के बाज़ार में सेंध लगाना, नए नए बाज़ार ढूंढना तथा मिली राशी को विकास पर खर्च करना (सतत और सकारात्मक बाजारी उपाय )१०. स्रजनात्मक, रोजगारोन्मुख तथा खोजी शिक्षा देकर कार्य उत्पादकता में वृद्धि उपरोक्त कुछ तथ्य तथा कुछ कारण है जिनके कारण आज भी हम पिछड़े है जबकि हमारा पडौसी देश चीन हमसे विकास में आगे है ज़रुरत है नेताओं को , जनता को सोचने की तथा कुछ कर दिखाने की एक एक कारण और बिंदु का हल संभव है बशर्ते प्रयत्न किया जाए .

5 टिप्‍पणियां:

  1. Sahi hai. Aaj hamare desh mei aaye din hone wale bomb blast, rajnitik uthal puthal,asthirta ke karan kei deshon mei yeh instruction jaari ho gaye hain ki India mat jaoo. Agar jaate ho to apni risk par. Aise mei desh ki chavi kya rah jati hai?Hamare yahan DESH ka VIKAS nahi dekha jata NETA apna VVIKAS dekhte hain.Par isse inkaar nahi kar sakte unki commodity mei QUALITY nahi hai.Phir janta bhi kutch nahi karti.Jo gine-chune log kutch karna chate hain to unki aawaj NAKKARKHANE MEI TUTI KI AAWAJ sabit hoti hai.

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

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  3. Cheen se hamaree tulna nahi ho sakti hai...wahan sakhtee se pariwaar niyojan kiya gaya..loktantr me ye mumkin nahee..

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  4. Cheen ne pariwaar niyojan ko prathmikta dee...ek ke baad honewale bachhe kee hatya kar dee jatee thi..Bharat me aisa nahee hai..tulna karte samay ye yaad rakhna chahiye!

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