शुक्रवार, 8 जनवरी 2010
नव चेतना : हिंदी विषये पर केशव सिंह की राय
मानसिकता तो दोहरी हो गई है, पर हमें अपने अस्तित्व के लिए, अपने देश, संस्कृति, नैतिक विचारों, मूल्यों, के लिए कुछ न कुछ प्रयास तो करना ही पडेगा नहीं तो वे दिन दूर नहीं जव हम सभी अपनी बात को किसी अपने के साथ प्रस्तुत करने के लिए किसी अपनी भाषा को ढूंढते रहेगे। फिर क्या होगा कि हमे अपनो की ही वात समभ से परे लगेगी......हमें अपनी भाषा पर शर्मिंदा होने ... बदले गौरव होना चाहिए और यह पहल हम जैसी युवा पीढी को करनी पडेगी जो एक भटकाव की ओर बढ रहे है औ............. और जो यह पहल कर रहें है उनका साथ देना चाहिए......... केशव जांगिड जी के साथ सभी हिन्दी प्रेमियों को धन्यवाद.......
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