बुधवार, 28 अप्रैल 2010
हिंदी आकादमी को बचाए ?
आज हम हिंदी आकादमी कि बात करते है . कुछ ऐसी बाते सामने आई है जो हिंदी कि अकादमी कि साख पर कालिक पोतने का काम करती है . पिछले दिनों जब हिंदी आकादमी के कार्यक्रम लोक बिम्ब (त्रिवेणी सभागार,दिल्ली ) चल रहा था . तब उनके एक कर्मचारी डा .लोकेश कि दिल का दोरा पड़ने से मोत हो गई थी ,आज वह विवादों में है . यह बात अब उड़ रही है कि उन्हें अपने आफिस में काम तक नहीं करने दिया जाता था .बहुत जय्यदा परेशान किया जाता था .इस कारण उनकी मोत हो गई . आकादमी में कई ऐसे काम होते है जो साहित्यिक तो बिलकुल नहीं है . ३० अप्रेल तक यहाँ सचिव कि नियुक्ति होनी है .हिंदी आकादमी के कर्मचारी ही त्राहिमाम कर रहे है वे नहीं चाहते कि कार्यवाहक सचिव फिर से आकर जंगल राज फेलादे . डा. लोकेश कि पत्नी से भी जबरदस्ती बंद कमरे में हलफनामे पर दस्तखत कराये गए . यह बात विश्वस्त सूत्रों से पता लगी है . मुख्य मंत्री शीला दीक्षित को तो यह कुछ भी नहीं पता होगा ,क्योकि उनके और उपाध्यक्ष श्री चक्रधर के सामने कुछ बाते तो आ ही नहीं पाती . यहाँ तक कि आकादमी कि महिला कर्मचारियों से तो बदतमीजी से बात कि जाती है . विष्णु प्रभाकर जी कि जनम तिथि पर सचिव महोदय तो एक महिला कर्मचारी से यहाँ तक कहा गए कि में तुझे देख लुगा ,ख़तम कर दूंगा ..आपके सामने यह बात इसलिए राखी जारही है कि जब आप हिंदी अकादमी के कार्यकर्मो में जाते है ,या साहित्यकार जब पुरूस्कार लेते है खूब आरोप लगते है , आज इसे सुधरने का मोका हमारे पास है ,क्योना कोई ऐसे सचिव को भेजे जो इस साहित्य संस्था को राजनीतीकारण से बचा सके, और ऐसी नोबत फिर नाए कि एक साहित्यिक संस्था को आखाडा बना दिया जाए . अगर आप के आसपास कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इन योग्यताओं को रखता हो ,तो उसे हिंदी आकदमी में सचिव के लिए आवेदन कैने को ३० अप्रेल से पहले कहे . वह हिंदी पी . एच .डी. हो .सरकारी नोकरी में ८-१० साल तक ८,००० के वेतन पर रहा हो . प्रशाशनिक अनुभव हो .अपनी पतिक्रिया जरुर दे , क्या पता हम हिंदी साहित्य कि इस अमूल्य धरोहर को बचा सके , नहीं तो एक बार फिर जंगल राज आ जायेगा ,ये सचिव जीके ही कथन है जो बाहर नहीं आ पाते है कि ,, पञ्च साल के लिए आने दो सबको देख लेगे ..
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