शनिवार, 26 दिसंबर 2009

समारोह संग एक प्रतियोगिता

मनोरंजन कलश (नव चेतना ) अंक के अवसर पर इस हिंदी बचाओ अभियान से जुड़े , मनोरंजन कलश की सदस्यता ले , हिंदी के लेखको से बातचीत कर एक हल तक पहुचने का प्रयास ......इस साहित्य उत्सव हेतु नाम देने के लिए केशव जांगिड @जीमेल.कॉम ,या मनोरंजन कलश @जीमेल. कॉम पर मेसेज करे । या कोशल किशोर (संपादक ) या केशव जांगिड (उप संपादक ) के फसबूक में जाकर मेसेज दे ,नाम और निम्न विषयों पर अपने विचार देने ओए हमारे सभी ब्लोग्स में स्थान पाने के लिए .... पाच दिन के इस उत्सव को पूरी तरह ओं लाइन मनाया जायगा । हिंदी को बचने में सयोग दे । चयनित विजेताओ को पुरुस्कारों से सम्मानित किया जायेगा । चयनित ५० लोगो की रचनाये और समीक्षा ही पोस्ट की जाएगी ।
सोजन्य ॥ बाल साहित्य क्लब ,कथा संसार ब्लॉग और मनोरंजन कलश


चर्चा के विषये ...१) भारत बिगडती राजनातिक दशा
२) बीजिंग ओलम्पिक जेसा हो पाएगा ,कॉमनवेल्थ खेल
३) कहा कमी है हमारे विकास में (चीन को धयान में रखकर )
४) हिंदी भाषा ,दशा और दिशा : कोन जिम्मेदार
५ ) भारतीय टीवी मीडिया : अयथार्थवादी और तथाकथित
६ ) भारतीय नारी : बन पाई अबला से सबला

इन विषयों में से किसी एक हेतु आपके मेसेज ५ जनवरी तक पोस्ट करे ....
७ से १२ जनवरी तक के इस उत्सव में होगा विचारमंथन ,मनोरंजन कलश में पाएगे आप स्थान ....

सविनय ...केशव जांगिड (उप संपादक ,मनोरंजन कलश )

सोमवार, 21 दिसंबर 2009



डाक्टर कविता किरण की रचना , केयर टू केयर की प्रमुख डाक्टर मोना कपूर का जीवन , डाक्टर जयप्रकाश गुप्त का हिंदी समीक्षा आलेख ,केशव जांगिड की कहानी विपिन चोधरी का नारी की पीढ़ा पर आलेख , मंजरी जोशी से एक मुलाकात ,भारतीय मीडिया पर विनोद विप्लव का व्यंग्य , और प्रभाष जोशी ,तसलीमा नसरीन की रचनाये .....
अंक जो आपको सोचने पर विवश कर दे ॥
प्रति मंगवाए या सदस्यता ले ॥ मूल्य मात्र ..१० /-
वार्षिक - १०० /- मात्र
फ़ोन - ०९२१०५००१६३ ( दिल्ली )
मेल - मनोरंजन कलश @ जीमेल .कॉम

सोमवार, 14 दिसंबर 2009

कविता - मेरा बसंत



मुस्कुराती कलियों के मेलो में ,

मकरंदित पुष्पों के झूलो में ,

्रमर से तितली के अनुबंधों में ,


्रीत - स्नेह के नवबंधो में ,

रहा है मेरा बसंत।



फाल्गुनी हवा की बयार में ,

हकते पलाश की बोछार में ,

धरा से गगन के कटबंधो में ,

सोंधी अमलताश की सुगंधों में ,

गुनगुना रहा है मेरा बसंत










पीत - मुदित सरसों के पुष्पों में ,
गुलमोहर की मधुकर डालो में ,

उन्मुक्त , उन्मादक विलासों में ,



नवगीतों ,बधाई भरे उल्लासो में ,



महक रहा है मेरा बसंत











































































































मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

मेरे प्रिय मित्र भारत भूषण ( फोटोग्राफेर) का संवेदनाओ से ओत प्रोत एक एल्बम ..................

लेखक : केशव जांगिड
स्त्रोत : बाल साहित्य बाल क्लब




देश आज २१ वी सदी में जा रहा है ।
गरीबी ,भुखमरी , लाचारी आज भी मुंह ताक़ रही है ,
कहा है देश की हितेषी सरकार , लोकतान्त्रिक शासन ।

इन देश के नोनिहालो का क्या होगा । जिन्दगी यो ही
पेट के लिए रोते रोते कट जाएगी । क्यों चुप है हमारी जनवादी सरकार ।






रोटी को तलाशती इनकी नाजुक आखे , माता -पिता के लाड को तरसती बाहे , कोंन है इनका सहारा .कहा है हमारे
मूक नेता जो इन्ही के नाम पर वोट लेने आते है ।







आए इनका सहारा बने । बाल साहित्य बाल क्लब की मुहीम से जुड़े । इन बच्चो को आपकी जरुरत है । इन तक भोजन , शिक्षा ,लाड , प्यार पहुचे । एक कोशिश करे ।

गीताप्रेस , शांतिकुंज और कई सेविसमाज है हमारे साथ ,अब आपकी बारी ,दुआ करे की इनका जीवन भी खुशियों से जगमगाए ।
संपर्क करे ....
केशव जांगिड
(निदेशक )
बाल साहित्य बाल क्लब
गोल मार्केट ,राजगढ़ (अलवर)
(राज० ) (३०१४०८)
फ़ोन : ०९२१०५००१६३
एक आशा की किरण जगाये ....
आओ एक भारत बनाये .......

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

एक संदेश
हिन्दी बचाओ अभियान में आपका स्वागत है
हिन्दी आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है ,
आओ हिन्दी को बचाए ,देश की भाषा ही देश का गोरव है , "मनोरंजन कलश" (मासिक पत्रिका ) इसी लो को आगे ले जा रही है ,जनवरी में "रास्ट्रभाषा विशेषांक " देश को समर्पित करके इस अभियान में सहयोग करे पत्रिका का अंक बुक कराये ,या वार्षिक सदस्य बने इसी विषय पर लेख , कविता , कहानी , समालोचना प्रेषित करे पोस्ट प्राप्त होने की अन्तिम तारीख दिसम्बर २००९
पता : केशवजांगिड @जीमेल.कॉम ( यहाँ रचना जल्दी प्राप्त होगी )
मनोरंजन कलश @जीमेल.कॉम (या भी दे सकते है )
कॉल कर पत्रिका में स्थान सुरिक्षित कराये ,रचना उत्तम होने पर ही चयनित होगी ( संपादक )
शब्द सीमा : ५०० शब्द
डाक से पोस्ट करे : संपादक ,मनोरंजन कलश , जे - , पांडव नगर ,गली नम्बर - , नई दिल्ली - ९२





लघुकथा - योजना

"
आज हजारो लोगो की मृत्यु नशे से हो रही है ,
लोग शराब पीकर बीमारियो से लड़ रहे है ,
अपनी जिन्दगी तबाह कर रहे है ,
हमें इस बुराई को समाज से ख़त्म करना है हमारी सरकार इसके लिए योजनाये बना रही है " चुनावी सभा में स्थानीय नेता रामजीभाईजी के इतना बोलते ही तालियों की गडगडाहट से माहोल चुनावी हो गया जब नेताजी अपने लाव - लश्कर के साथ रवानगी लेने को थे ,तो एक टीवी पत्रकार ने उनसे पूछ लिया ,
"
रामजी शराब से होने वाली मोतो को रोकने के लिए आपकी सरकार क्या योजना बना rahi रही है , जरा बताइए "
"
योजना बड़ी ही कारगर और गुप्त है , अभी बता दूंगा तो विपक्ष हंगामा मचा देगा " सायरन की आवाज करती उनकी गाड़ी धूल उड़ाती हुई चली गई
अगले दिन नगर के प्रमुख दनिक में ख़बर छपी
"
सरकार ने सो शराब की दुकानों को लाईसेंस दिया ,शराब पर टैक्स में वृदि् टैक्स के मुनाफे से सरकार नशामुक्ति केन्द्र खोलेगी - रामजी भाई "
मंत्रीजी का बयान देख कर वह पत्रकार भी आवक था

-
केशव जांगिड (लेखक)





लघुकथा - नारी

"
अनुज वह एक लड़की है "
"
ठीक है तुम बच्चा गिरवा दो , मै आता हू "
"
वह अस्पताल पहुचता है , तब तक अनुराधा गर्भपात करवा चुकी थी
"
इस दहेजी और महंगाई के ज़माने मै लड़की का बोझ मेरा बेटा नही उठाएगा , समझी तू " रह रह कर उसे सास की बाते याद रही थी यह चौथी बार था , जब सास की कर्णभेदी

बाते और पति की मारपीट से तंग आकर उसने अस्पताल का रास्ता देखा था दो - तीन घंटो बाद अनुराधा पति के साथ घर गई पुरे रास्ते उसे अनुज की जलील करने बाते सुननी पड़ी वह तो रो - रो कर निढाल सी हो गई थी समय पंख लगा कर चला एक दिन घर में कोहराम मच गया,

जब मेज पर पड़ी अनुराधा की गर्भपात रिपोर्ट सास ने देखी वह अनुज के कमरे की तरफ़ दौडी
"
हाय राम , इस कुलक्षणी ने हमें बर्बाद कर दिया , कोख मै पल रहे लड़के को गिरवा आई " सास ने अनुज को रिपोर्ट दिखाई क्रोध से लाल हुए अनुज का हाथ अनुराधा पर चल पाता , तब तक वह उसका हाथ पकड़ चुकी थी
"
मै नही चाहती थी की मेरी कोख से एक खुनी का पुत्र जन्मे , जिसके दिल में अपने पिता की तरह ही नारी का सम्मान ना हो , जो उसे पेरो की जूती समझता हो , जो इन्सान मातृशक्ति और सृजनदात्री नारी का सम्मान ना कर सके ,उसका अंश कोख में रखकर कंलकित नही होना चाहती थी "
"
जीवन का आधार केवल पुरूष ही नही है , नारी भी है , जिस दिन आपको यह सत्य समझ में जाए , मुझे वापस बुला लेना " कहते हुए वह रणचंडी की तरह वह चली गई
उसके पदचाप अब भी माँ , बेटे के दिमाग को झंझोड रहे थे

-
केशव जांगिड (लेखक )




कविता - रिश्ते


कुछ देहे से जन्मे ,
कुछ कोख में पड़े अजन्मे ,
कुछ मनके ,
कुछ अनमने,
कितने रिश्ते अब तक मेने बुने ,


कुछ चाहते जो ,
रिश्ते ना बन पाई ,,
कुछ रिश्तो में ,
चाहत ना बस पाई ,
जिन्दगी रिश्तों और चाह्तों
की डोर में,


उलझी जिन्दगी को यू सुलझाया ,
रिश्तों का जिन्दगी से समझोता कराया ,
रिश्तों से समझोता करते ,
खूब देखे मेने ,
लेकिन समझोतो से रिश्ते ,
बुने मेने बुने
-
केशव जांगिड (लेखक और कवि )




हिन्दी बचाओ अभियान


हिंदी हूँ मैं! हिंदी हूँ मैं..
भारत माता के माथे की बिंदी हूँ
मैदेवों का दिया ज्ञान हूँ मै, घट रही वो शान हूँ मै,
हिन्दुस्तानियों का इमान हूँ मै॥
इस देश की भाषा थी मै,करोडो लोगो की आशा थी मैहिंदी हूँ मैं!
हूँ मैं.. भारत माता के माथे की बिंदी हूँ मैसोचती हूँ शायद बची हूँ मै,
किसी दिल में अभी भी बसी हूँ मै,पर अंग्रेजी के बीच फसी हूँ मै...
न मनाओ तुम मेरी बरसी,मत करों ये शोक सभाएं,
मत याद करो वो कहानी...
नही किसी की जुबानीसोचती थी हिंद देश की भाषा हूँ मै,
अभिव्यक्ति की परिभाषा हूँ मैं,सच्ची अभिलाषा हूँ मैं,
लेकिन अब निराशा हूँ मैं...जी हाँ हिंदी हूँ
मैंभारत माँ के माथे की बिंदी हूँ मैं...
(हिमांशु डबराल की पंक्तिया )