रविवार, 24 जनवरी 2010

हास्य -व्यंग्य उत्सव -2010

मनोरंजन कलश और बाल साहित्य क्लब के इस हास्य -व्यंग्य उत्सव में आप सबका अभिनन्दन है । हिंदी लखन में आज सक्रीय भागीदारी की कमी है , अत : उसी ग्रहण को हिंदी से हटाने में हम कोशिश मग्न है , आप का साथ इस उत्सव में जरुरी है ,अपनी स्तरीय हास्य - व्यंग्य कहानी ,कविताए ,आलेख जल्दी पोस्ट करे .....
मनोरंजन कलश के मार्च विशेषांक में आप स्थान पाएगे .आज से और कल तक अपनी रचन्ये पोस्ट करे
पता : मनोरंजन कलश @ जीमेल .कॉम या केशव जांगिड @जीमेल.कॉम ....
याद रहे हिंदी आज सक्रिय भागीदारी मांग रही है , कवल गाल बजाने वाले हिंदी का भला नहीं करेगे ।
साधुवाद ....


केशव जांगिड (कवि और लेखक )

हास्य -व्यंग्य उत्सव -2010


मनोरंजन कलश पत्रिका मार्च माह में अपना हास्य - व्यंग्य विशेषांक प्रकाशित करने जा रहा है । इसी क्रम में फेसबुक पर २ फरवरी से २० फरवरी -२०१० तक हम हास्य महोत्सव मानाने जा रहे है । जीवन की भाग दौड से परे एक मोलिक प्रयास हमारे और आपके द्वारा , हमारे इस महोत्सव में अपनी हास्य कथाए , कविताए , व्यंग्य आलेख , छुटपुट रचनाये पोस्ट करे , फेसबुक के साथ साथ मनोरंजन कलश में भी आप स्थान पाएगे । अपनी कर्मठता दिखाए ,हसी हम सबके लिए जरुरी है , खूब उत्साह के साथ भाग ले । अपनी रचनाये हिंदी में फेसबुक पर पोस्ट करे या ...केशव जांगिड @जीमेल .कॉम या मनोरंजन कलश @जीमेल .कॉम पर पोस्ट करते रहे ............

शुक्रवार, 22 जनवरी 2010


मनोरंजन कलश पत्रिका मार्च माह में अपना हास्य - व्यंग्य विशेषांक प्रकाशित करने जा रहा है । इसी क्रम में फेसबुक पर २ फरवरी से २० फरवरी -२०१० तक हम हास्य महोत्सव मानाने जा रहे है । जीवन की भाग दौड से परे एक मोलिक प्रयास हमारे और आपके द्वारा , हमारे इस महोत्सव में अपनी हास्य कथाए , कविताए , व्यंग्य आलेख , छुटपुट रचनाये पोस्ट करे , फेसबुक के साथ साथ मनोरंजन कलश में भी आप स्थान पाएगे । अपनी कर्मठता दिखाए ,हसी हम सबके लिए जरुरी है , खूब उत्साह के साथ भाग ले । अपनी रचनाये हिंदी में फेसबुक पर पोस्ट करे या ...केशव जांगिड @जीमेल .कॉम या मनोरंजन कलश @जीमेल .कॉम पर पोस्ट करते रहे ............

रविवार, 17 जनवरी 2010

रेखा राजवंशी की पुस्तक , बुमरेंग , का लोकार्पण

गत १५ जनवरी को रेखा राजवंशी के कविता संग्रह बूम्रंग (किताबघर ) का लोकार्पण हिंदी भवन में किया गया ।
इस अवसर पर श्री अशोक चक्रधर , कन्हेयालाल नंदन , आनामिका ,अलका सिन्हा और गण मान्य लोग शामिल थे । इस पुस्तक में ऑस्ट्रेलिया के ११ भारतीय अप्रवासी कवियों की कविताए है ..........कवि ओए लेखक श्री केशव जांगिड ने ली कुछ तस्वीरे ....................

श्री चक्रधर संग रेखा राजवंशी जी ............................









श्री कन्हेयालाल नंदन जी (लेखक और पत्रकार ).....................















अनामिका जी भाषण के दोरान ...............................







मंचासीन अतिथि .................................























आयोजन में रखी गई मनोरंजन कलश पत्रिका ............................

























संचालिका अलका सिन्हा ..........................................







पुस्तक बूम्रंग .......................................




















विदेशी अतिथि .................................................
















































युवा दिवस कवि सम्मलेन (हिंदी भवन )

अयोध्या के कवि ज्ञानेश दिर्वेदी ........................









युवा मंच पर कवि हर्मेंद्र पाल का कविता ...................







कुमार केसरी की कविता .............................................








बिहार से पधारे उदय कुमार भारती की कविता ....................






मंचासीन अतिथि और कविगण ..................................








दिल्ली के कवि चिराग जैन और मुख्य अतिथि स्वामी प्रज्ञानंद जी ......







गजल कार और गीत कार श्री विकल साकेती जी का गीत ..........








श्री पवन श्रीवास्तव जी की कविता ...................................












































































































सोमवार, 11 जनवरी 2010

नव चेतना उत्सव - (जमाल अहद )

यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि हमारे देश के पिछड़ेपन के मूल कारण हैं हमारे नेता. आज़ादी के बाद से आजतक कैसे कैसे नेता आये और हमलोगों पर अपनी मनमानी करके चले गए. शायद पांच प्रतिशत ही उनमे बुद्धिजीवी या पढ़ेलिखे थे , बाकी सब फूहड़ गंवार . और अफ़सोस कि बात यह है कि हमने ही उनको चुनकर अपने ऊपर राज करने दिया. इस गलती के लिए हमसब जिम्मेदार हैं. हमारे देश में एक से बढ़कर एक पढ़े लिखे लोग हैं लेकिन हमने जाहिल गंवार लोगों को ही चुना. इसमें कुछ लोगों का स्वार्थ ज़रूर होगा लेकिन अधिकतर जनता भेडचाल में एक के पीछे एक जाकर वोट डाल कर ऐसे निष्क्रिय और नपुंसक लोगों को चुनते गए जो सिर्फ अपना पेट भरना जानते हैं. उनको देश कि क्या चिंता. अरे अगर माकूल पैसा मिले तो वोह अपने मातृभूमि का भी सौदा करने से नहीं हिचकिचाएंगे. शर्म आती है ऐसे लोगों को अपना नेता अपना लीडर कहते हूवे. १.३ बिलियन लोगों में क्या येही लोग मिले जो हमारे देश को घिसट घिसट कर और दूसरों के रहम करम पर रख कर चलाने में सक्षम थे?
अब बहुत हुवा. पानी सर से ऊंचा हो चूका है और अगर हम अब भी नहीं जागे तो हमारा डूबना निश्चित है. और इसके लिए कोई दूसरा नहीं, कोई विदेशी ताकत नहीं बल्कि हम खुद जिम्मेदार हैं. अब भी समय है कि हम सही लोगों को चुने जो जनता कि सही प्रतिनिधित्व करें,उनकी परेशानियों को समझें और जनहित में कार्य करें ताकि हमारा देश और विकसित देशों कि तरह आगे आगे रहे. हमारे देश कि सभ्यता और संस्कृति को दूसरों ने अपना कर फायदा कर लिया और बहुत कामयाब होगये. अब समय आगया है कि हम अपनी प्रतिभाओं को समझें, उनका सही अवलोकन करें और ऐसे नेताओं को चुने जो हमारे देश को प्रगति कि राह पर ले जाने के लिए मार्ग प्रशस्त करें.
जरूरत है एक ऐसी पद्धति, एक ऐसी नियमावली कि जिसके तहत हमारे नेताओं का चयन हो और उनमें से एक भी ऐसा न हो जो हमारी अपेक्षा के अनुरूप न हो. क्योंकि एक सड़ी मछली सारे तालाब को प्रदूषित कर देती है.
इस बारे में चंद सुझाव यह हैं:(१) नेताओं के चयन के लिए एक न्यूनतम और अधिकतम उम्र कि सीमा निर्धारित होनी चाहिए. (२) इनकी कम से कम पढ़ाई बी.ए या बी.एस.सी तक कि होनी चाहिए.(३) इनमें ३३% अनुभवी और बड़ी उम्र के लोगों के लिए, ३३% युवाओं के लिए और ३३% महिलाओं के लिए सीटें होनी चाहिए. बाकी१% उन अनुभवी लोगों के लिए होना चाहिए जो उम्र की अधिकतम सीमा पार कर चुके हों लेकिन उनका अनुभव हमारे लिए आवश्यक हो.(४) सभी वर्ग और सभी विभाग के लोगों का इसमें समावेश होना चाहिए जैसे डाक्टर,इंजीनिअर ,शिक्षक,उद्योगपति, नामी गिरामी खिलाडी, अवकाशप्राप्त आईएएस और आईपीएस, हाईकोर्ट के जज इत्यादि इत्यादि.(५) हर विभाग के मंत्री को उस विभाग की पूरी जानकारी होनी चाहिए. जैसे खेल मंत्री एक भूतपूर्व खिलाड़ी हो, स्वास्थमंत्री कोई वरिष्ट डाक्टर हो, उद्योगमंत्री एक इंजीनीयर हो, शिक्षामंत्री कोई अवकाशप्राप्त शिक्षक हो. आजकल अंगूठाछाप लोग बड़ी बड़ी मंत्रालयों के सर्वेसर्वा बन जाते हैं और काम के नाम पर एक धेला भी नहीं आता है. यहाँ बैठे तो काम ख़राब करते ही हैं, विदेशों में जाकर भी अपनी मूर्खता का परिचय देते हैं जिससे हमारी जग हसाई होती है. (६) हर मंत्री का कार्यकाल ५ साल का हो और चुने जाने पर उनको अपनी राज्य के बजाये दुसरे राज्य में भेजा जाए. (७) किसी भी मंत्री को अधिक से अधिक ३ बार चुनाव में खड़े होने की अनुमति होनी चाहिए.(८) चुनाव के लिए आईएएस और आईपीएस जैसी एक परीक्षा होनी चाहिए जिसका क्रमांक ५०% हो और बाकी के ५०% जनता के वोट से आयें. इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के पश्चात् इनकी मनोवैज्ञानिक जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लग सके की क्या यह अपने विभाग का भार उठाने में सक्षम होंगे? जरूरत पड़ने पर लाई डिटेक्टर टेस्ट भी होना चाहिए.(९) सारे विभागों और मंत्रियों की साल भर की उपल्भधियाँ और कमियाँ जनता को मालूम होनी चाहिए और कमियों के कारण की समीक्षा होनी चाहिए. कमी के जिम्मेदार लोगों को कारण बताओ नोटिस देना चाहिए और अनुकूल जवाब नहीं मिलने पर उनको उनकी गलती के लिए जिम्मेवार ठहराना चाहिए.
यह एक सपना ही है शायद लेकिन अगर ऐसा हुवा तो हमारा देश भी अमेरिका, जापान और फ्रांस से मुकाबला कर सकेगा। हमारे इतने पढ़े लिखे और टैलेंटेड लोगों को रोजी रोटी के लिए विदेशों में नहीं भटकना पड़ेगा और वोह अपने देश में ही रह कर अपना जीविका पा सकेंगे और देश की उन्नति और प्रगति में हाथ बता सकेंगे।

(इस लेख हेतु शुभ कामनाये- केशव जांगिड )